15 Sep 2026
नई दिल्ली, 15 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। UPI New Rules Fact Check: डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और मीडिया के एक हिस्से में यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर नया चार्ज लगाने जा रही है। दावे किए जा रहे हैं कि संसद से कानून पास होने के बाद अब आपकी जेब ढीली होगी।
अगर आप भी Google Pay, PhonePe या Paytm का इस्तेमाल करते हैं, तो इस खबर को ध्यान से पढ़िए। सरकार ने इस पूरे मामले पर एक आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। आइए जानते हैं कि इस दावे की असली सच्चाई क्या है।
फैक्ट चेक: क्या है वायरल दावे का सच?
दावा: सरकार यूपीआई ट्रांजैक्शन पर टैक्स या चार्ज लगाने जा रही है और इसके लिए गजट भी आ गया है।
नतीजा: पूरी तरह भ्रामक और गलत (False & Misleading)। आम जनता या ग्राहकों के लिए यूपीआई ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगने जा रहा है।
14 सितंबर 2026 के सरकारी गजट में क्या है?
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत 14 सितंबर 2026 को एक विशेष गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के नियम आम जनता को राहत देते हैं:
₹2,000 तक का लेनदेन बिल्कुल फ्री: गजट में साफ कहा गया है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर कोई भी बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर किसी भी तरह का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट शुल्क नहीं वसूल सकता। ऐसा करना गैर-कानूनी होगा।
P2P ट्रांसफर पर कोई असर नहीं: यदि आप अपने दोस्तों, परिवार या किसी रिश्तेदार को पैसे ट्रांसफर (Person to Person) करते हैं, तो वह हमेशा की तरह शत प्रतिशत मुफ्त रहेगा।
फिर मीडिया में चार्ज लगने की अफवाह क्यों उड़ी?
दरअसल, संसद के मानसून सत्र में सरकार ने कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पास किया था। मीडिया में इस कानून के तकनीकी शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया। इस कानून के जरिए सरकार ने केवल एक कानूनी ढांचा (Enabling Provision) तैयार किया है। इसका उद्देश्य भविष्य में बैंकों और पेमेंट कंपनियों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत निकालने के लिए सिर्फ चुनिंदा बड़े मर्चेंट्स (बड़ी कंपनियों/मॉल/कॉरपोरेट्स) पर बेहद सीमित रूप से 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) लगाने का रास्ता साफ करना है।
वित्त मंत्री ने संसद में क्या कहा था?
इस भ्रम पर खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्थिति साफ की थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यूपीआई देश के लिए एक डिजिटल पब्लिक गुड (Digital Public Good) है। इसका उद्देश्य देश में डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। इस नए कानून का असर आम जनता, छोटे रेहड़ी-पटरी वालों, कैब ड्राइवरों या स्थानीय किराना स्टोर मालिकों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।
भ्रम बनाम हकीकत
लेनदेन का प्रकार| सोशल मीडिया का दावा| आधिकारिक सरकारी नियम (Latest Gazette)
दोस्तों/रिश्तेदारों को पैसे भेजना| अब हर ट्रांसफर पर चार्ज लगेगा| पूरी तरह मुफ्त, कोई चार्ज नहीं है|
₹2,000 तक का मर्चेंट पेमेंट| दुकान पर स्कैन करने पर एक्स्ट्रा पैसे कटेंगे| पूरी तरह मुफ्त, गजट के अनुसार इस पर चार्ज लगाना प्रतिबंधित है|
₹2,000 से ऊपर का पेमेंट| ग्राहकों के बैंक खाते से पैसे कटेंगे| ग्राहकों के लिए मुफ्त, भविष्य में सिर्फ बड़े कॉर्पोरेट्स पर नियम लागू हो
सकते हैं|
यदि आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आ रहा है कि यूपीआई महंगा होने जा रहा है, तो उस पर बिल्कुल विश्वास न करें और न ही उसे आगे फॉरवर्ड करें। आपके लिए डिजिटल पेमेंट पहले की तरह ही सुरक्षित, आसान और पूरी तरह मुफ्त रहेगा।