17 Sep 2026
नई दिल्ली, 17 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर के मुख्य सचिव को 2023 की जातीय हिंसा के पीड़ितों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मणिपुर के एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट पर ध्यान दिया, जिसमें कहा गया था कि राहत शिविरों में 608 मौतें हुईं, लेकिन केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम किया गया। कोर्ट ने सवाल किया है कि सभी अप्राकृतिक मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया।
मणिपुर में हिंसा की शुरुआत तब हुई, जब कुछ जनजातियों ने बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को 'अनुसूचित जनजाति' का दर्जा दिए जाने की मांग का विरोध किया। दरअसल, 19 अप्रैल, 2023 को मणिपुर उच्च न्यायालय ने मणिपुर सरकार को आदेश दिया था कि वह मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने पर विचार करे। इस आदेश के बाद राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसक जातीय झड़पें शुरू हो गईं। बाद में 2024 में मणिपुर उच्च न्यायालय ने अप्रैल, 2023 के अपने विवादित आदेश को वापस ले लिया। मणिपुर हिंसा के दौरान जुलाई 2023 में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था।