17 Sep 2026
नई दिल्ली, 17 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति पर सुनवाई करते हुए आज एक बार फिर केंद्र सरकार से कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने पर विचार करने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि चूंकि ये एक राष्ट्रीय नीति है, इसलिए इसमें एक तय संस्थागत ढांचा काम करता है। अगर कक्षा 7 से 10 तक के छात्रों को छूट दी गई है तो कक्षा 6 के छात्रों को ये राहत क्यों नहीं दी जा सकती है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि कक्षा 6 के छात्रों को चार साल बाद बोर्ड परीक्षा का सामना करना है, इसलिए उन्हें अभी से तैयार करने की जरुरत है। केंद्र सरकार ने कहा कि इस पूरे मामले और तीन भाषा नीति से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर विचार करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। इसके साथ ही इस मुद्दे पर एक विस्तृत नोट भी दाखिल किया जा रहा है। तब याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने केंद्र के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि अफसरों ने कक्षा 6 के लिए इस नीति के कार्यान्वयन में ढील देने पर असहमति जताई है। तब केंद्र ने कहा कि कक्षा 7 से 10 तक के छात्रों को इस नीति के तहत पहले ही छूट दी जा चुकी है। ऐसे में कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीन भाषा नीति लागू करने दिया जाना चाहिए।
याचिका छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई की नई तीन भाषा नीति में नौंवी कक्षा से दो और भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य बनाया गया है। इन तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना जरुरी है। याचिका में कहा गया है कि कि अचानक कक्षा नौ के छात्रों को दो अतिरिक्त भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करना उनकी दसवीं बोर्ड की तैयारी प्रभावित कर सकता है। वे अचानक दो भाषाएं कैसे सीख जाएंगे और दसवीं में उनकी परीक्षा देंगे। इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।