17 Sep 2026
नई दिल्ली, 17 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। कांग्रेस ने उत्तराखंड में 1,320 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए अडानी पावर के साथ किए गए समझौते को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि अडानी पावर के छत्तीसगढ़ स्थित बिजली संयंत्र से 25 वर्षों तक बिजली खरीदने का रास्ता साफ करने के लिए टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए और यूजेवीएन-टीएचडीसी की प्रस्तावित सरकारी परियोजना को रद्द कर दिया गया। कांग्रेस ने इस मामले में सरकार से टेंडर प्रक्रिया, परियोजना रद्द करने के कारणों और बिजली खरीद समझौते की शर्तों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के मीडिया एवं पब्लिसिटी चेयरमैन और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रस्तावित परियोजना को रद्द करने के बाद अडानी पावर के पक्ष में टेंडर की शर्तों में बदलाव किए। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को सरकारी संसाधनों और बिजली उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा मुद्दा मानती है।
खेड़ा के अनुसार, 16 जनवरी 2025 को यूजेवीएन-टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से प्रस्तावित थर्मल पावर परियोजना को रद्द कर दिया गया। इसके कुछ दिनों बाद, 3 फरवरी 2025 को उत्तराखंड सरकार ने नया टेंडर जारी किया। इसी दिन अडानी पावर ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में अपने बिजली संयंत्र के विस्तार के लिए पर्यावरण मंजूरी का आवेदन दिया था।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि नए टेंडर में कुल 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए। उनके मुताबिक, इन बदलावों के तहत बिजली संयंत्र उत्तराखंड के बाहर देश के किसी भी हिस्से में लगाने की अनुमति दी गई, 1,320 मेगावाट की पूरी बिजली एक ही बोलीदाता से लेने की बाध्यता रखी गई और दूसरे राज्य से बिजली लाने की ट्रांसमिशन लागत का भार जनता पर डाला गया।
पवन खेड़ा ने कहा कि टेंडर में निर्माण की समय सीमा के अलावा फिक्स्ड चार्ज की अधिकतम सीमा को 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था के तहत उत्तराखंड द्वारा बिजली नहीं लेने की स्थिति में भी बिजली उत्पादक को 25 वर्षों तक भुगतान करना पड़ सकता है।
कांग्रेस नेता ने बिजली खरीद समझौते की कुल राशि 1.66 लाख करोड़ रुपये बताई और कहा कि समझौता 25 अगस्त 2026 से 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से शुरू हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली की खरीद उत्तराखंड के संसाधनों से होगी, जबकि संयंत्र छत्तीसगढ़ में स्थित होगा और इसका लाभ अडानी पावर को मिलेगा।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में उत्तराखंड सरकार और अडानी पावर का पक्ष इस प्रेस रिलीज में उपलब्ध नहीं है। समझौते की कुल वित्तीय देनदारी, भुगतान की वास्तविक शर्तों और टेंडर में किए गए बदलावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी दस्तावेजों और बिजली खरीद समझौते का परीक्षण आवश्यक होगा।
खेड़ा ने बताया कि वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूजेवीएन-टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम के तहत 1,320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने और कोयला आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। कांग्रेस के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में बिजली की उपलब्धता बनाए रखना था।
उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बावजूद 16 जनवरी 2025 को राज्य सरकार ने संयुक्त उपक्रम को रद्द कर दिया। सरकार की ओर से कथित तौर पर यह तर्क दिया गया कि परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पाएगी, जबकि संयुक्त उपक्रम ने निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था।
कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना को रद्द करने का निर्णय क्यों लिया गया और उसके स्थान पर निजी कंपनी से बिजली खरीदने का विकल्प क्यों चुना गया। पार्टी ने टेंडर की शर्तों में व्यापक बदलाव और 25 वर्ष के बिजली खरीद समझौते के औचित्य पर भी जवाब मांगा।
कांग्रेस ने आरोपों के आधार पर सरकार से कई सवाल उठाए हैं, जिनमें टेंडर की शर्तों में बदलाव, संयंत्र को उत्तराखंड से बाहर लगाने की अनुमति, एक ही बोलीदाता से पूरी बिजली खरीदने की बाध्यता और समझौते की अवधि शामिल हैं। इन सवालों पर उत्तराखंड सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं का आकलन किया जा सकेगा।