18 Sep 2026
नई दिल्ली, 18 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) को एक योग्य महिला उम्मीदवार सुमित्रा को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आईओसी ने उसे केवल महिला होने के कारण एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रीफिलिंग हेल्पर की नौकरी देने से मना कर दिया गया था।
मामला 38 साल पुराना है। हरियाणा के गुढ़ा गांव निवासी सुमित्रा ने 1998 में आईओसी में खलासी, चपरासी या रीफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू दिया था। सुमित्रा का नाम उन 49 लोगों की सूची में शामिल था जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने आईओसी के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के लिए की थी, लेकिन सुमित्रा को नौकरी नहीं मिली जबकि बाकी लोगों को नियुक्ति पत्र दिए गए। उसके बाद सुमित्रा ने फैसले को ट्रायल कोर्ट में चुनौती दी। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि महिला नौकरी के लिए तय योग्यता पूरी करती थीं। ट्रायल कोर्ट के फैसले को आईओसी ने अपील की और 6 अगस्त 1993 में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया। इसके बाद सुमित्रा ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2025 में निचली अदालत का फैसला पलट दिया जिसमें आईओसी को सुमित्रा को मजदूर के अलावा किसी दूसरे पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।
उच्च न्यायालय के फैसले को आईओसी ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। आईओसी के वकील ने कहा कि इस काम में भारी एलपीजी सिलेंडर उठाने पड़ते हैं और रात की शिफ्ट होती है, इसलिए शायद अधिकारियों ने महिला को उपयुक्त नहीं माना। इस पर उच्चतम न्यायालय ने आईओसी के वकील से सवाल किया कि क्या महिलाएं घरों में गैस सिलेंडर नहीं उठातीं। न्यायालय ने कहा कि हम भारत में रहते हैं और हर दिन महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं। हम कहते हैं कि महिला देवी के समान है। ऐसे में भारत सरकार की एक कंपनी की ओर से यह महिला गरिमा का अपमान है।