19 Sep 2026
देहरादून, 19 सितंबर (एजेंसी)। उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में कभी बंद पड़े घर अब पर्यटकों की मेजबानी कर रहे हैं। गांवों से रोजगार की तलाश में बाहर गए लोगों के लौटने और स्थानीय युवाओं और महिलाओं के होम स्टे व्यवसाय से जुड़ने के साथ ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा मिल रही है। सरकारी योजनाओं के जरिए होम स्टे को स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है।
प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य में करीब 6,500 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इनमें 22 प्रतिशत से अधिक ने होम स्टे व्यवसाय को अपनाया है। वहीं, प्रदेशभर में पांच हजार से अधिक होम स्टे संचालित होने का अनुमान है। इससे पर्यटन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर भी बढ़े हैं।
होम स्टे को बढ़ावा देने के लिए संचालित दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत पिछले चार वर्षों में 537 लाभार्थियों को 79 करोड़ 28 लाख 18 हजार रुपये की सब्सिडी दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में परियोजना लागत की 50 प्रतिशत, अधिकतम 15 लाख रुपये तथा मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत, अधिकतम 7.50 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है।
योजना का मकसद केवल पर्यटकों के ठहरने की सुविधा बढ़ाना नहीं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ना भी है। होम स्टे संचालक पर्यटकों को स्थानीय खानपान, संस्कृति और जीवनशैली से जोड़ते हैं, जिससे पर्यटन का लाभ स्थानीय स्तर पर रहने की संभावना बढ़ती है।
रुद्रप्रयाग जिले का सारी गांव होम स्टे आधारित ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं का उदाहरण है। गांव में 40 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं। यहां पहुंचने वाले ट्रेकर्स और पर्यटकों से स्थानीय कारोबार को भी गति मिल रही है।
होम स्टे के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में किराना, परिवहन, स्थानीय उत्पाद, खानपान और गाइड जैसी गतिविधियों के लिए भी अवसर बन रहे हैं। इस तरह एक होम स्टे केवल एक परिवार की आय का जरिया न रहकर आसपास की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर रहा है।
उत्तरकाशी जिले का जादुंग गांव ग्रामीण पर्यटन के साथ सीमांत क्षेत्रों को आबाद करने की नीति की एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है। भारत-चीन सीमा के निकट स्थित इस गांव को होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां छह होम स्टे का निर्माण अंतिम चरण में है।
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सामरिक कारणों से सेना ने नेलांग और जादुंग गांवों को खाली कराया था। अब दोनों गांव केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में शामिल हैं। होम स्टे और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से इन सीमांत गांवों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने की तैयारी है।
'मेरी योजना मेरी सरकार' कार्यक्रम के तहत ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना भी लागू की गई है। इसके तहत पिछले चार वर्षों में 258 पात्र लोगों को लाभ दिया जा चुका है। योजना का उद्देश्य ट्रेकिंग क्षेत्रों में पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के साथ स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ना है।
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में ट्रेकिंग और पर्वतीय पर्यटन स्थल ऐसे हैं, जहां बड़े होटल या रिसॉर्ट की जगह स्थानीय घरों में ठहरने की व्यवस्था पर्यटकों को अलग अनुभव देती है। ऐसे क्षेत्रों में होम स्टे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।
दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य में लागू है। उत्तराखंड के मूल निवासी ही योजना के पात्र हैं। होम स्टे के लिए नए भवन के निर्माण अथवा पुराने भवन के नवीनीकरण के बाद उसे पर्यटन विकास परिषद में पंजीकृत कराना अनिवार्य है।
आवेदन राज्य सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति में आवेदक के साक्षात्कार के बाद प्रस्ताव स्वीकृत होने पर ऋण स्वीकृति के लिए बैंक को भेजा जाता है।