19 Sep 2026
कोलकाता, 19 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद राज्य में राजनीतिक तकरार मची हुई है। हालांकि गिरफ्तारी की एक दिन बाद शनिवार को सीआईडी ने अपने एक बयान में बताया है कि उनका दामन बेहद संगीन और खौफनाक आपराधिक वारदातों से सना हुआ है। उन पर हत्या, हत्या की कोशिश के अलावा हथियार रखने संबंधी गंभीर धाराओं में राज्य के दो पुलिस थानों में चार मुकदमे दर्ज हैं। सीआईडी ने कहा है कि मिलन प्रधान कोई साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि पिछले उन्नीस वर्षों से कानून की नजरों से बचता आ रहा एक दुर्दांत और आदतन अपराधी है। हत्या, अपहरण, जानलेवा हमला, दंगा भड़काना और अवैध हथियारों का इस्तेमाल करना उसके पुराने आपराधिक तौर-तरीकों का हिस्सा रहा है।
पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम थाना क्षेत्र अंतर्गत गांगरा गांव के निवासी मिलन प्रधान का आपराधिक रिकॉर्ड साल 2007 के बहुचर्चित नंदीग्राम आंदोलन के दौर से जुड़ा हुआ है। राज्य अपराध जांच विभाग द्वारा जुटाए गए विवरण के मुताबिक, मिलन प्रधान के खिलाफ चार अलग-अलग जघन्य आपराधिक मामलों में अदालतों द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। इनमें से तीन मामले नंदीग्राम थाने में और एक मामला पड़ोसी खेजुरी थाने में दर्ज है। उस पर भारतीय दंड संहिता की हत्या, हत्या के प्रयास, हत्या के मकसद से अपहरण, साक्ष्य मिटाने, घर में जबरन घुसपैठ करने, घातक हथियारों से लैस होकर दंगा फैलाने और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न सख्त धाराओं के तहत गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ पहला बड़ा मामला 30 अप्रैल 2007 को नंदीग्राम थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें हत्या और दंगे के साथ शस्त्र अधिनियम की धारा 27 लगाई गई थी। इसके बाद 30 जुलाई 2007 को खेजुरी थाने में अवैध हथियार रखने और दंगे का मामला दर्ज हुआ। उसी वर्ष 08 नवंबर और 15 नवंबर को नंदीग्राम थाने में दर्ज दो अन्य मुकदमों में उस पर अपहरण, हत्या और लाश या सबूत गायब करने जैसी क्रूर धाराएं लगाई गईं। इन सभी मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया था, जिसमें मिलन प्रधान को आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित किया गया था।
पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पिछले उन्नीस वर्षों के दौरान कई बार मिलन प्रधान को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह हर बार चकमा देकर भूमिगत हो जाता था। संबंधित अदालतों में पुलिस द्वारा बार-बार गैर-निष्पादन रिपोर्ट पेश की जाती रही कि आरोपित लगातार फरार है और अपनी पहचान छिपाकर रह रहा है। इतने वर्षों तक कानून की गिरफ्त से बाहर रहने के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने उसे नंदीग्राम जैसी संवेदनशील सीट से विधानसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बना दिया।
वहीं, ममता बनर्जी के खेमे द्वारा मिलन प्रधान को तुरंत खुला समर्थन देना भी अब बड़े राजनीतिक सवालों को जन्म दे रहा है कि आखिर ऐसे कुख्यात और घोषित भगोड़े को चुनावी ढाल देने की रणनीति के पीछे की असली वजह क्या थी।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को पुलिस ने मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया है, जिसे लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इसे तानाशाही भरा कदम और लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया है।