21 Sep 2026
नई दिल्ली, 21 सितंबर (एजेंसी)। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस कोर्ट ने सोमवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर लिस्ट में कथित रूप से नाम जुड़वाने पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया गया था। स्पेशल जज विशाल गोगने ने मामला मजिस्ट्रेट को वापस भेजते हुए कहा कि इस पर दोबारा विचार करें और तर्कसंगत आदेश पारित करें।
सेशंस कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश तर्कसंगत नहीं है। सेशंस कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष इस मामले पर 29 सितंबर को दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया। सेशंस कोर्ट ने 25 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को वकील विकास त्रिपाठी ने सेशंस कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके पहले 11 सितंबर को एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिका खारिज कर दी थी।
याचिका में कहा गया था कि वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम 1980 में ही जुड़ गया था, जबकि वो 1983 में भारत की नागरिक बनीं। याचिका में कहा गया था कि सोनिया गांधी का नाम दिल्ली के नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के वोटर लिस्ट में 1980 में ही जुड़ गया था, जबकि वे उस समय भारत की नागरिक भी नहीं थीं। बीच में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से 1982 में हटाया गया और बाद में 1983 में फिर नाम जोड़ा गया। सोनिया गांधी भारत की नागरिक 1983 में बनीं।
याचिका में कहा गया था कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन भी अप्रैल 1983 में दिया था। याचिका में कहा गया था कि जब सोनिया गांधी 1983 में भारतीय नागरिक बनीं तो 1980 में वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए कुछ फर्जी दस्तावेज दिए गए होंगे, जो कि एक संज्ञेय अपराध है। ऐसे में कोर्ट सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले पर न तो सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया था और न ही दिल्ली पुलिस को।