22 Sep 2026
हरिद्वार, 22 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। सनातन धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध) का विशेष महत्व है। 16 दिनों का यह समय पूरी तरह से हमारे पूर्वजों को समर्पित होता है। मान्यता है कि अगर हमारे पितर खुश हैं, तो जीवन में सुख-शांति और तरक्की बनी रहती है। इस वर्ष श्राद्ध पक्ष में एक तिथि का क्षय है, जिस कारण से पितृ पक्ष 15 दिनों का होगा।
पंडित दीपक जोशी के मुताबिक अगर पितृ किसी भी वजह से नाराज हो जाएं तो कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सनातन धर्मावलम्बियों को श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण व पिण्डदान अवश्य करना चाहिए। श्री जोशी के मुताबिक पंचांग की गणना के अनुसार, पितृपक्ष का आरंभ 26 सितम्बर से होगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध होगा।
इस बार पितृपक्ष में गजच्छाया योग भी बन रहा है। दरअसल, इस बार 10 अक्टूबर को सूर्य और चंद्रमा दोनों हस्त नक्षत्र में गोचर करेंगे जिससे गजच्छाया योग का निर्माण होगा। इस बार चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन होगा। बता दें कि पितृ अमावस के दिन सूर्य और चन्द्रमा हस्त नक्षत्र में संचार करने से गजच्छाया योग बना है। इस योग में श्राद्ध, पितृ-तर्पण व तीर्थस्नान का अत्यधिक माहात्म्य होता है। इस दिन 10 अक्तूबर, शनिवार को यह योग सूर्योदय से सूर्यास्त तक होगा।