23 Sep 2026
नई दिल्ली, 23 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने भारत आकर उत्तर-पूर्व के जातीय समूहों को ट्रेनिंग देने के आरोपित छह यूक्रेनी नागरिकों को आज एक-एक लाख रुपये के नकद मुचलके (कैश बांड) पर डिफॉल्ट जमानत दे दी। कोर्ट ने इन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के सामने समझौते (कंपाउंडिंग) के आधार पर इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत अपराधों से बरी कर दिया है।
स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने पेट्रो हुर्बा, टरस स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मैरियन स्टेफानकीव, मास्कीम होंचारुक और विक्टर कामिंसिकी को जमानत देने का आदेश दिया। एफआरआरओ ने प्रत्येक आरोपित पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पहले कोर्ट ने 18 सितंबर को इसी मामले में आरोपित अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइके को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही रकम के जमानती के आधार पर जमानत देने का आदेश दिया था, लेकिन आज कोर्ट ने मैथ्यू एरॉन वैनडाइके पर लगाई गई जमानत की शर्त में भी बदलाव किया है और उसे एक लाख रुपये का जमानत बॉन्ड भरने से छूट दे दी है। अब उसे एक लाख रुपये के कैश बॉन्ड पर रिहा किया जाएगा।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 8 सितंबर को चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में सात विदेशी आरोपितों के खिलाफ फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाया गया। एनआईए ने चार्जशीट में मैथ्यू आरोन वैन डाइके के अलावा यूक्रेन के उपरोक्त सभी छह आरोपितों के नाम भी शामिल किए थे। एनआईए ने इस मामले में यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गईं। इसी आधार पर अदालत ने माना कि कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपितों को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार प्राप्त हो गया है।
इसके पहले 31 अगस्त को उच्च न्यायालय ने जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इन विदेशी नागरिकों पर आरोप है कि ये म्यांमार में अवैध तरीके से घुसे और मिजोरम के संरक्षित इलाकों में प्रवेश कर जातीय समूहों से संपर्क कायम किया। इन पर अवैध हथियारों की आपूर्ति करने, जातीय समूहों को ट्रेनिंग देने और उन्हें ड्रोन चलाने में सहयोग करने का आरोप है।
एनआईए के मुताबिक ये विदेशी वीजा पर भारत आए और फिर मिजोरम में प्रवेश किया, जो एक संरक्षित क्षेत्र है। इसके बाद वे म्यांमार में दाखिल हुए और जातीय युद्ध समूहों से संपर्क साधा। एनआईए के मुताबिक इन विदेशी नागरिकों को म्यांमार में प्रशिक्षण दिया गया था, जिसके बाद वे जातीय युद्ध समूहों को प्रशिक्षित कर रहे थे। ये समूह भारत में सक्रिय विद्रोही समूहों से जुड़े हुए हैं। इन पर यह आरोप भी है कि ये यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप लेकर आए थे।