24 Sep 2026
नई दिल्ली, 24 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि सेवा ही मुख्य मकसद होना चाहिए और सेवा का संदेश, उपदेश देकर नहीं बल्कि अपने आचरण और काम के जरिए देना चाहिए। उन्होंने सेवा संकल्प यात्रा में शामिल युवाओं से कहा कि राजनीति में कितनी भी बड़ी सत्ता या ऊंचाई हासिल हो जाए, उनका रास्ता सेवा का ही रहना चाहिए और वे कभी सेवा के मार्ग से विचलित न हों।
प्रधानमंत्री ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वडनगर से वाराणसी जा रहे सेवा यात्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद के दौरान कहा, “सेवा करते-करते सेवा का संदेश देना है, सेवा का उपदेश नहीं देना है। हम सेवा कर-करके ही सेवा का संदेश देंगे।” उन्होंने कहा कि लोगों को उनके आचरण से दिखना चाहिए कि सत्ता कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, सेवा ही उनका मार्ग रहेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वडनगर और वाराणसी दो प्राचीन एवं जीवंत शहर हैं। एक उनकी जन्मभूमि है और दूसरा कर्मभूमि। इन दोनों शहरों के बीच सेवा का यह बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत 20 टोलियां 10 राज्यों के 193 जिलों, 773 तहसीलों और 10,159 गांवों से होकर गुजर रही हैं। यात्रा की कुल लंबाई करीब 35,576 किलोमीटर है और इसमें 380 रात्रि पड़ाव निर्धारित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यात्रा के दौरान ग्राम सभाओं, लाभार्थियों और आम नागरिकों से संवाद, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य सेवा गतिविधियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में यात्रा और सेवा दोनों सामाजिक संस्कारों से जुड़े रहे हैं। ऐसी यात्राएं करुणा, विनम्रता, टीमवर्क और अनुशासन सिखाती हैं तथा समाज से जुड़ने का अवसर देती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति और चुनाव अपनी जगह हैं तथा शासन व्यवस्था अपनी जगह, लेकिन सेवा यात्री राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि साल 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाशक्ति की बड़ी भूमिका होगी और युवाओं को देश के विभिन्न क्षेत्रों, सामाजिक वर्गों और लोगों की आकांक्षाओं को जमीन पर जाकर समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यात्रा युवाओं को करुणा, विनम्रता, टीमवर्क और अनुशासन सीखने का अवसर देती है। उन्होंने यात्रियों से अपने अनुभव दर्ज करने तथा यात्रा के दौरान मिले लोगों, उनके अनुभवों और स्थानीय स्तर पर देखे गए अच्छे कार्यों का दस्तावेज तैयार करने को कहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब शासन के मूल में सेवा का भाव होता है तो नीतियों के केंद्र में नागरिक होते हैं। उन्होंने गरीबों को मुफ्त अनाज, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला, पीएम किसान और पीएम सूर्य घर जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवाभाव ही इन योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा, “सेवा परमो धर्मः, सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। नर सेवा नारायण सेवा, अर्थात मानव की सेवा ही ईश्वर की सेवा है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि गांवों, किसानों और स्थानीय समुदायों के पास ज्ञान और अनुभव का समृद्ध भंडार है। एक गांव का अच्छा प्रयोग दूसरे गांव के काम आ सकता है और एक क्षेत्र का अनुभव पूरे देश की शक्ति बन सकता है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान देश की विविधता में एकता को समझने और इसे दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
मोदी ने कहा कि सेवा यात्रियों की मेहनत और अनुभव विकसित भारत के निर्माण की यात्रा को गति देंगे। प्रधानमंत्री ने यात्रियों की यात्रा निर्विघ्न रहने की कामना करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक जिस तरह काम किया है, उसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहें।