25 Sep 2026
भुवनेश्वर, 25 सितंबर (एजेंसी)। ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के दिन शुक्रवार को भी सदन का प्रथमार्ध विपक्षी विधायकों के हंगामे और नारेबाजी की भेंट चढ़ गया। एमएमडीआर एक्ट को ओडिशा के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसे वापस लेने की मांग को लेकर विपक्षी बीजद व कांग्रेस के सदस्यों ने सदन के बीचोंबीच आकर प्रदर्शन किया। हंगामे के कारण प्रश्नकाल, शून्यकाल सहित सदन की निर्धारित कार्यवाही प्रभावित हुई। गतिरोध जारी रहने पर विधानसभा के उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने मात्र चार मिनट के बाद ही सदन की कार्यवाही शाम चार बजे तक स्थगित कर दी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बुधवार सुबह 10.30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने प्रश्नकाल शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई, लेकिन इसी दौरान विपक्षी विधायक एमएमडीआर एक्ट को लेकर नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से उठकर सदन के बीचोंबीच पहुंच गए। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर सरकार और एमएमडीआर एक्ट के विरोध में नारे लिखे हुए थे।
हंगामे के बीच उपाध्यक्ष ने तेलकोई से विधायक डाॅ. फकीर मोहन नायक के ओपन स्कूल से संबंधित के प्रश्न का उत्तर देने के लिए विभागीय मंत्री नित्यानंद गोंड आमंत्रित किया। शोर-शराबे के बावजूद मंत्री ने प्रश्न का उत्तर देना जारी रखा।
उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने हंगामा कर रहे विपक्षी विधायकों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। हालांकि विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी और सदन का माहौल लगातार शोरगुलपूर्ण बना रहा।
इसके बाद उपाध्यक्ष ने उद्योग मंत्री संपद स्वाईं को एक प्रश्न का उत्तर देने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने हंगामे के बीच जवाब देना शुरू किया, लेकिन विपक्षी सदस्यों का प्रदर्शन जारी रहा। स्थिति सामान्य नहीं होने पर उपाध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शाम चार बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत मंगलवार को हुई थी। सत्र के पहले दिन भी एमएमडीआर एक्ट को वापस लेने और शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया था। दिवंगत विधायकों और नेपाल में आई बाढ़ को लेकर शोक प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद विपक्षी सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। हंगामे के कारण पहले दिन भी सदन का कामकाज प्रभावित हुआ था। बुधवार व गुरुवार को भी यही समान स्थिति रही । इस कारण दूसरे व तीसरे दिन भी कोई कामकाज नहीं हो पाया था।